सीधी सी बात
जो बड़ा होता है, उसे बताना नहीं पड़ता
जिसे बताना पड़ता है, वो बड़ा नहीं होता
जो अपना होता है, उसे सफ़ाई नहीं देनी पड़ती
जिसे सफाई देनी पड़े, वो अपना नहीं होता
✍️ चिराग़ जैन
जो बड़ा होता है, उसे बताना नहीं पड़ता
जिसे बताना पड़ता है, वो बड़ा नहीं होता
जो अपना होता है, उसे सफ़ाई नहीं देनी पड़ती
जिसे सफाई देनी पड़े, वो अपना नहीं होता
✍️ चिराग़ जैन
मैं अपनी हर जीत भुला दूँ, तुम बिसरा दो हार को
दोतरफ़ा पोषण से सींचें सीधे-सच्चे प्यार को
जब धरती ने हरियाली का रूप सजाना छोड़ दिया
तब अम्बर ने बादल लेकर आना-जाना छोड़ दिया
कोई तो आकर्षण मिलता सावन की बौछार को
दोतरफ़ा पोषण से सींचें सीधे-सच्चे प्यार को
दिन की हर तारीफ़ भुलाकर महक लुटाई रातों पर
ध्यान नहीं अटका ख़ुशबू का दुनिया भर की बातों पर
रातों ने होंठों से चूमा खिलते हरसिंगार को
दोतरफ़ा पोषण से सींचें सीधे-सच्चे प्यार को
सबके जीवन में दुनिया की थोड़ी तो मजबूरी है
फिर भी हर इक रिश्ते में थोड़ा सम्मान ज़रूरी है
कब तक मथुरा ठुकराएगा गोकुल की मनुहार को
दोतरफ़ा पोषण से सींचें सीधे-सच्चे प्यार को
✍️ चिराग़ जैन
अभी गुलाबी रंगत वाले फूल नहीं मुरझाए होंगे
अभी मेज से तुमने मेरे तोहफे नहीं हटाए होंगे
अभी फोन में मेरा नम्बर उसी नाम से दर्ज मिलेगा
अभी गैलरी में केवल मेरे फोटो का सर्च मिलेगा
तुम तक मेरा प्यार न पहुँचे, तुम ऐसी परवाज न होना
इतनी भी नाराज न होना
प्यार भरे पल याद आएं तो अनबन को सुलझा ही लेना
बार-बार मैं फोन करूँ तो मन ही मन मुस्का ही लेना
पीछे पड़ जाने की मेरी आदत से तो वाकिफ हो ही
दाँत पीसकर, झुंझलाकर तुम मेरा फोन उठा ही लेना
समय बिताने भर को विंडो शॉपिंग की मोहताज न होना
इतनी भी नाराज न होना
कोई फिल्मी गीत बजेगा तो मेरी याद आ जाएगी
जब फूलों पर नूर सजेगा तो मेरी याद आ जाएगी
जिस खिड़की पर बैठे हम-तुम घंटों बतियाते रहते थे
जब उस पर सावन बरसेगा तो मेरी याद आ जाएगी
मुझे भूल जाने की कोशिश में अपना सुख साज न खोना
इतनी भी नाराज न होना
मीठे मीठे झगड़ों को सबकी चर्चा तक मत ले जाना
किसी सहेली को अपने मन की ये बातें मत बतलाना
भीगी पलकों से जो कंधा ढूंढोगी वो धुंधला होगा
अनबन कड़वाहट बन जाए इतने आँसू नहीं बहाना
जिद के कारण प्यार भुला दो, ऐसा कठिन रिवाज न होना
इतनी भी नाराज न होना
फिर भी यदि नाराज रहो तो थोड़ी रस्म निभाती रहना
अगर अकेली बैठी हो तो झूठा फोन मिलाती रहना
कॉलेज की कैंटीन हमारे झगड़े को पब्लिक ना कर दे
मेरे खाते में चढ़वाकर कभी-कभी कुछ खाती रहना
मुझे देखकर खुश हो जाने का अपना अंदाज न खोना
इतनी भी नाराज न होना
✍️ चिराग़ जैन
समय मिले तो तुम भी आना दो झूठे आँसू टपकाने
हमने जो मिलकर देखे थे, उन सपनों की शोकसभा है
तुम जिनका तर्पण कर आए जीवन नदिया की धारा में
जो आँखों में ठहर गए थे, उन लम्हों की शोकसभा है
जिनसे फिल्टर हो जाते थे, कड़वाहट के सब कीटाणु
सबसे पहले अपनेपन की दोनों किडनी फेल हुई हैं
संवादों के सन्नाटे में दिल छोटा होता जाता था
मुस्कानों को लकवा मारा, आलिंगन को जेल हुई है
जिन दीवारो-दर को हम-तुम दोनों अपना घर कहते थे
जिन रिश्तों को अपना माना, उन अपनों की शोकसभा है
तस्वीरों पर धूल जमी है, गुलदस्तों में वीरानी है
आंगन की तुलसी मुरझाई, सूखी है सुख की हरियाली
अपशकुनों ने पैर पसारे, सारी चीजें़ लावारिस हैं
सारा कलरव मौन हुआ है, सारा घर लगता है खाली
जिनको उड़ने की हिम्मत हम दोनों मिल-जुलकर देते थे
हिम्मत कर पाओ तो आना, उन पंखों की शोकसभा है
✍️ चिराग़ जैन
जी भर कर पड़ताल करो तुम
मन में उपजी शंकाओं की
संदेहों से खारी होंगी
मीठी झीलें आशाओं की
जब भी प्रश्न करोगे कोई उत्तर तुमको मिल जाएगा
पर संदेहों के कंकर से अपनापन तो हिल जाएगा
इक हलचल सी मच जाएगी, पाल हिलेगी नौकाओं की
संदेहों से खारी होंगी, मीठी झीलें आशाओं की
ख़ुद से पूछो अग्नि परीक्षा से आख़िर किसने क्या पाया
सीता ने सम्मान गँवाया, राघव ने अधिकार गँवाया
धोबी के लांछन से कम थी, सारी पीड़ा लंकाओं की
संदेहों से खारी होंगी, मीठी झीलें आशाओं की
यह भी सच है, राम छुएं तो प्राण पुनः संचारित होंगे
यह भी सच है पीड़ित दोषी से पहले अभिशापित होंगे
पत्थर बनकर रह जाएगी, देह अभागी अबलाओं की
संदेहों से खारी होंगी, मीठी झीलें आशाओं की
क्वारे सच पर प्रश्न उठाना क्या सचमुच संत्रास नहीं है
कैसा क्षण है, पतवारों को नाविक पर विश्वास नहीं है
शंका के बीहड़ में पनपी, नागफनी आशंकाओं की
संदेहों से खारी होंगी, मीठी झीलें आशाओं की
खुद को साबित करते-करते, ढल जाएगी धूप सुनहरी
आक्रोशों की हुई गवाही, भावुकता की लगी कचहरी
चतुराई तो हत्यारिन है, निश्छल सी अभिलाषाओं की
संदेहों से खारी होंगी, मीठी झीलें आशाओं की
✍️ चिराग़ जैन