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अंजुरी

तुमसे मिलते ही बह निकलती हो कविता -ऐसा नहीं है। न तो मोम है कविता न ही आग हो तुम। तुम तो अंजुरी हो छपाक से भर जाती हो कविता में डूबकर! ✍️ चिराग़...
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