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मोल केवल ध्येय का है

प्रश्न तो उद्देश्य का है, मोल केवल ध्येय का है जो मिला आशीष बनकर, अर्थ उस पाथेय का है मात्र जीने के लिए सब लोग जीकर मर रहे हैं कर्म तो सब कर रहे हैं। कर्म तो सब कर रहे हैं। जो सहजता से नियत पथ पार कर उजियार देगी बस उसी पहली किरण को अर्घ्य का वैभव मिलेगा बादलों के...
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