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शोर शराबा क्यों है

रे सागर! सच-सच बतला दे इतना शोर शराबा क्यों है भीतर तो चुप-चुप रहता है तट पर मार दिखावा क्यों है मीठी नदिया के पानी को, तू है इतना प्यारा सागर वो तो तुझमें डूब गई पर, तू ख़ारा का ख़ारा सागर इन लहरों में इक नदिया की कलकल का परछावा क्यों है दिन भर सूरज की गर्मी का चुप-चुप...

कुछ ग़लत भी नहीं

कुछ सही भी नहीं, कुछ ग़लत भी नहीं प्रेम फंसता नहीं ज्ञान-अज्ञान में प्राण तो सृष्टि भर से अधर हो गए देह उलझी रही मान-अपमान में प्रेम ने जब हृदय को सहज कर दिया कोई सीमा बची ही नहीं लाज की श्याम के बालपन पर सलोनी लगी नग्नता और निर्लज्जता आज की लाज दो हालतों में सताती...

सैनिक का दावा

ये शेरों की दहाड़ें झूठ हैं, कोरा दिखावा है हमें अपनों से ख़तरा है, ये हर सैनिक का दावा है बहुत लाचार हैं; पैरों में बेड़ी है सियासत की वगरना हाथ में बंदूक है, सीने में लावा है ✍️ चिराग़...

आकांक्षा

मैं तुम्हारी आँख में कुछ स्वप्न अपने आँज आया तुम मेरे सपनों को अपने आँसुओं में मत बहाना जब तुम्हें आभास हो, गंतव्य दुर्गम हो रहा है या सफलता के प्रयासों के जकड़ ले पाँव कोई राह का मौसम गुलाबी हो करे कर्तव्य विस्मृत या तुम्हें आकृष्ट कर बैठे, मनोहर गाँव कोई तब घड़ी भर...

परलोक की अवधारणा

सत्य तो लगती नहीं, परलोक की अवधारणा पर आपसे मिलने की हर इक आस इस ही पर टिकी है हाथ की रेखाओं का कोई नहीं हो अर्थ फिर भी आपसे आजन्म दूरी की कथा इनमें लिखी है कुछ नहीं होता है करवा चौथ के निर्जल व्रतों से किन्तु अपनी आस्था को घोल देना अर्घ्य जल में पत्थरों के कान सुन...
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