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परदेसी जीवन

1 ये है हासिल विदेश जाने का ध्यान रखता हूं दाने-दाने का कौन मुझको दुलारता आकर फायदा क्या था कुलबुलाने का 2 जाने क्या बन के रह गया हूँ मैं ध्यान रखता हूँ दाने-दाने का घर कहीं, मैं कहीं, सुक़ून कहीं ये है हासिल विदेश जाने का ✍️ चिराग़...
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