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शबरी

नित्य सजाती रही अंगना, प्रभु राम के दर्श की आस में शबरी आस की ऐसी निशंक तपस्या से दर्ज हुई इतिहास में शबरी सीता वियोग से व्याकुल थे, तब घुल गयी राम की प्यास में शबरी राम को भक्ति का स्वाद चखा गयी बेर की जूठी मिठास में शबरी ✍️ चिराग़...

हर सम्भव के साधन हैं

सपनों की आँखें पथराईं हिम्मत की पाँखें कुम्हलाईं संघर्षों की तेज पवन ने प्राणों की शाखें दहलाईं इन सारे झंझावातों से लोहा लिया ज़मीर ने अमृत सोख लिया रावण का राघव के इक तीर ने राजतिलक की शुभ वेला में राघव को वनवास मिला स्वर्ण जड़ित आभूषण उतरे, जंगल का संत्रास मिला...
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