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राजनेता की ईमानदारी

सत्ता से चूक गए राजनेता की ईमानदारी उस चरित्रवती जवान विधवा की तरह है जिससे लताड़ खाने के बाद हर लौंडा कहता फिरता है- “खेत में हाथ पकड़ कर मो ते लिपट रही हती छिनाल, मैं धक्का दई के भाज आयो।” ✍️ चिराग़...

बँटवारा

आदमी की तरह जन्मते ही बँट जाते हैं भाव भी अलग-अलग जातियों में अलग-अलग धर्मों में। प्रसव की पीड़ा भावों की दुनिया में भी एक जैसी है। और वहां भी आ चुकी है कवि का पेट चीरकर सर्जिकल डिलीवरी की प्रक्रिया। बढ़िया ही है इस तकनीक में दर्द नहीं सहना पड़ता! देवनागरी की देह में क़ैद...

आरएस पुरा

मैंने आरएस पुरा बॉर्डर कई बार देखा है। सतवारी एयरपोर्ट से निकलकर धान के खेतों से गुज़रते हुए कई बार पहुंचा हूँ उस गेट तक जहां माइलस्टोन लगा हुआ है “सियालकोट 11 किलोमीटर”। ज़ीरो लाइन भी देखी है। “919 इण्डिया” का मार्क-स्टोन…. तिरंगे में रंगी...

उलाहना

एक अजीब से रिश्ते में उलाहना देते हुए कहा तुमने- “आज बारिश हो रही है मैं भीग रही हूँ बरसात में तुम मत आना तुम्हें तो डर लगता है ना भीगने से।” मैंने कहा- “नहीं, भीगने से नहीं भीगने के बाद सूखने से।” ✍️ चिराग़...

बुलंदी

क्या हुआ हासिल बुलंदी पर पहुँच कर ऐ ख़ुदा जश्ने-दिल यां जश्ने अब्रां, जश्ने-रूह, जश्ने-सबा ✍️ चिराग़...
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