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राजनेता की ईमानदारी

सत्ता से चूक गए राजनेता की ईमानदारी उस चरित्रवती जवान विधवा की तरह है जिससे लताड़ खाने के बाद हर लौंडा कहता फिरता है- “खेत में हाथ पकड़ कर मो ते लिपट रही हती छिनाल, मैं धक्का दई के भाज आयो।”

✍️ चिराग़ जैन

बँटवारा

आदमी की तरह
जन्मते ही बँट जाते हैं
भाव भी
अलग-अलग जातियों में
अलग-अलग धर्मों में।

प्रसव की पीड़ा
भावों की दुनिया में भी
एक जैसी है।
और वहां भी
आ चुकी है
कवि का पेट चीरकर
सर्जिकल डिलीवरी की प्रक्रिया।
बढ़िया ही है
इस तकनीक में दर्द नहीं सहना पड़ता!

देवनागरी की देह में क़ैद भावों को
कई बार देखा है
फ़ारस और रोमन के डीएनए से मैच होते।
भावों में भी देखे गए हैं
अनैतिक सम्बन्ध
आदमी की तरह।
भाव भी मरते हैं
आदमी की तरह।

भावों ने बहुत कुछ सीखा है
आदमी से।
लेकिन आदमी
कभी नहीं सीख पाया
एक भाषा में रहते हुए
कई भाषाओं में
अनुवाद हो जाने की कला।

हम फैलाना चाहते हैं
बाइबल को
गीता को
कुरआन को
जातक को
आगम को।
लेकिन समेट लेना चाहते हैं
अपने ईसा
अपने कृष्ण
अपने पैगम्बर
अपने बुद्ध
अपने महावीर।

हमने शास्त्र बना दिया है
किताबों को
विस्तृत करके।
और इंसान बना दिया है
भगवान को
संकुचित कर के।

✍️ चिराग़ जैन

आरएस पुरा

मैंने आरएस पुरा बॉर्डर कई बार देखा है। सतवारी एयरपोर्ट से निकलकर धान के खेतों से गुज़रते हुए कई बार पहुंचा हूँ उस गेट तक जहां माइलस्टोन लगा हुआ है “सियालकोट 11 किलोमीटर”। ज़ीरो लाइन भी देखी है। “919 इण्डिया” का मार्क-स्टोन…. तिरंगे में रंगी भारतीय पोस्ट…. हरे रंग में रंगी पाकिस्तानी पोस्ट… “सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा” और “पाकिस्तान जिंदाबाद” के नारे…. सब देखे हैं। साथ ही देखी है एक लाचारी भरी दहशत, अपने गांववालों में…. एक हताशा भरा अविश्वास, अपने सैनिकों में…!
यूं ही पूछ लिया था एक सैनिक से मैंने -“सिंह साहब, बॉर्डर पर रहकर डर तो रहता होगा?”
उसने ठहर कर बताया था – “ज्जे पकिस्तानियो का कोई भ्रोसा नी ए साब।”
कई दिनों से टीवी पर न्यूज़ देखते हुए उस सैनिक के शब्द कानों में गूँजने लगते हैं।

✍️ चिराग़ जैन

उलाहना

एक अजीब से रिश्ते में
उलाहना देते हुए कहा तुमने-
“आज बारिश हो रही है
मैं भीग रही हूँ बरसात में
तुम मत आना
तुम्हें तो
डर लगता है ना भीगने से।”

मैंने कहा-
“नहीं, भीगने से नहीं
भीगने के बाद सूखने से।”

✍️ चिराग़ जैन

बुलंदी

क्या हुआ हासिल बुलंदी पर पहुँच कर ऐ ख़ुदा
जश्ने-दिल यां जश्ने अब्रां, जश्ने-रूह, जश्ने-सबा

✍️ चिराग़ जैन

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