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प्रतीक्षा

कब उगेगा दिन, तुम्हारे आगमन का मैं बहुत दिन से प्रतीक्षा कर रहा हूँ कब कोई आकार होगा इस सपन का मैं बहुत दिन से प्रतीक्षा कर रहा हूँ मैं युगों से रोज़ लिख-लिखकर संदेशे बादलों के हाथ भेजे जा रहा हूँ शुद्धतम जल से चरण धोऊँ तुम्हारे आँसुओं को भी सहेजे जा रहा हूँ कब मुझे...

प्रेम : पावनता का द्वार

एक पहर ठहरी सखी, कान्हा जी के ठौर। पहुँची कोई और थी, लौटी कोई और।। योगेश छिब्बर जी का यह दोहा भारत में प्रेम के उत्कर्ष को समझने के लिये पर्याप्त हैं। भारत में प्रेम का चरम यह है कि मीरा ने जो प्रेमगीत रचे, वे भक्ति की मानक कविताएँ बनकर जग में प्रसिद्ध हुए। यह भारतीय...

प्यार समझना मुश्किल क्यों है

इस दुनिया में प्यार रहे तो भावों का सत्कार रहे तो कितना प्यारा होगा ये संसार समझना मुश्किल क्यों है प्यार समूचे जीवन का है सार; समझना मुश्किल क्यों है किस्सा सुनकर मन सबका कहता है इसमें भूल हुई है बिन मतलब की दुनियादारी पाँखुरियों में शूल हुई है जो रांझे के साथ हुई थी...

हम तुम पार उतर जाएंगे

सुख होगा, उल्लास रहेगा कभी-कभी कुछ त्रास रहेगा जब सम्बन्ध निभेगा तो फिर उसमें हर एहसास रहेगा अच्छे-बुरे समय से हम-तुम, मिलकर साथ गुज़र जाएंगे अपनेपन की नौका लेकर, इक दिन पार उतर जाएंगे हम दोनों ने इस क़िस्से को मिलकर साथ सँवारा भी है इक किरदार तुम्हारा भी है, इक किरदार...

आहट

वो तुमसे मेरी पहली मुलाक़ात थी और सिर्फ़ तुम जानती थीं कि आख़िरी भी…! स्टेशन पर खड़े चिड़चिड़ा रहे थे सभी लोग कि ट्रेन लेट क्यों हो रही है और हर आहट के साथ सहम जाता था मैं -’हाय राम! कहीं गाड़ी तो नहीं आ रही!’ ✍️ चिराग़...
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