छल
आपके पक्ष में खड़ा कोई सिपाही जब शत्रु के साथ छल करता है, तब वह आपके साथ छल करने का अभ्यास कर रहा होता है।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
आपके पक्ष में खड़ा कोई सिपाही जब शत्रु के साथ छल करता है, तब वह आपके साथ छल करने का अभ्यास कर रहा होता है।
✍️ चिराग़ जैन
Blank Verse, Chirag Jain Writings, Koi Yoon Hi Nahin Chubhta, Poetry
ओ माधो जी!
कल मैंने बाज़ार में देखी रूह तुम्हारी
काफ़ी सजी-धजी लगती थी
यूँ लगता है
तुमने उसको नहलाने में
अपनी आँखों का सब पानी
ख़र्च कर दिया!
वो जो गै़रत वाला जोड़ा
तुम हरदम पहने रहते थे
कल मैंने उस ही जोड़े में
रूह तुम्हारी लिपटी देखी
आँखें झुकी हुई थी उसकी
गर्दन नीचे गड़ी हुई थी
आँखों का पानी
माथे पर
बूंदेें बनकर छलक रहा था
‘दो रोटी’ क़ीमत लिखी थी
साथ लिखा था-
‘दिल, ज़मीर, इज़्ज़त और ग़ैरत
मुफ़्त मिलेंगी’!
क्यों माधो जी!
रूह बेचकर माधो से तुम
‘मैडी’ हो गए!
✍️ चिराग़ जैन
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