मन और गंगा
सोचा था
मन को
गंगा जैसा पावन करके आएंगे
लेकिन
लौटे हैं
गंगा को
मन जैसा मैला करके!
✍️ चिराग़ जैन
Chintan ke Swar, Chirag Jain Writings, Free Verse, Poetry
सोचा था
मन को
गंगा जैसा पावन करके आएंगे
लेकिन
लौटे हैं
गंगा को
मन जैसा मैला करके!
✍️ चिराग़ जैन
Article, Chirag Jain Writings, Prose, Seriously Funny
देश भर में दीवाली का माहौल है और बिहार में चुनाव का। हालाँकि राजनीति तो बिहार को ही अयोध्या मानकर अपने राजतिलक की प्रतीक्षा कर रही है।
हर दल स्वयं को भरत माने बैठा है कि सत्ता के रामचंद्र जी आकर उसी से गले लगेंगे। सत्ता के गले पड़ने के लिए हर नेता ने ख़ुद के भरत होने की घोषणा कर रखी है, लेकिन बिहार जानता है कि ये सब भरत, विभीषण बन जाने का सही मौक़ा तलाश रहे हैं।
दरअस्ल चुनाव वह पंचवटी है जिसमें हर रावण, साधु बनकर सीताहरण का अवसर तलाशता फिरता है। मारीच मुद्दों को भटकाने के लिए सीता के सामने कंचनमृग बनकर विचरता है और जो लक्ष्मण, सीता की सुरक्षा के लिए उपस्थित होता है उसे सीता खरी-खोटी सुनाकर ख़ुद अपने से दूर कर देती है।
बहरहाल टिकटों की आतिशबाज़ी हो चुकी है, जिनके पटाखे फुस्स हो गए उन्होंने अपने रॉकेट की बोतल का मुँह पार्टी कार्यालय की ओर मोड़ दिया। जिनको टिकट मिल गई उन्होंने अपने भीतर के बारूद को कपूर बताकर पार्टी की आरती उतारनी शुरू कर दी।
जिन्हें टिकट की सूची में जगह नहीं मिली, उन्होंने अपने-अपने लंकेश को भ्रष्टाचारी घोषित कर दिया है। उधर हर लंकेश मन ही मन सेतुनिर्माण की सूचना से भयभीत है, किंतु अपने चेहरे पर अहंकार का मास्क चिपकाकर अपने विरोधियों को भालू-बंदर सिद्ध करने पर तुला है।
नीतीश कुमार जब भी चुनाव प्रचार पर निकलते हैं तो उन्हें यह स्मरण रहता है कि अपनी सोने जैसी इमेज की लंका में उन्होंने ख़ुद अपनी ही पूँछ से आग लगाई है।
अयोध्या में राम के राजतिलक की तैयारियाँ चल रही हैं और लंका भीषण युद्ध में घिरी हुई है। चुनाव के शोर-शराबे से चैन की नींद सो रहे कुम्भकर्ण भी डिस्टर्ब होकर जाग गए हैं।
कोई अपना मेघनाद दांव पर लगा रहा है तो कोई अपने लक्ष्मण के लिए संजीवनी मंगवा रहा है। कोई पराये वानरों को भी अपना बनाने में जुटा है और कोई अपने भाई को भी लतिया रहा है।
हर पटाखे की बत्ती सुरसुरा रही है, लेकिन हर उम्मीदवार इस आशंका से ग्रस्त है कि कहीं ऐसा न हो कि बत्ती उसके पटाखे की जले और धमाका किसी और के पटाखे में हो जाए।
युद्ध के बाद जिसे सीता मिलेगी उसके घर दीवाली मनेगी और बाकी सब अपने कुनबे के साथ बैठकर अमावस्या मनाएंगे। लेकिन एक बात तय है कि फ़िलहाल देश में दीवाली का माहौल है।
✍️ चिराग़ जैन

Chirag Jain Writings, Poetry, Purushottam
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दीपक ने दिखाया-
“मौन रहकर काम करो
दीर्घायु हो जाएगा
उजियारा।”
पटाखे ने सिखाया-
“धमाका करो
शोर मचाओ!
रौशनी से ज़्यादा ज़रूरी है
रौशनी की गूँज।”
मैं समझ गया
कि मानवता
क्यों रोकना चाहती है युद्ध
क्यों सजाना चाहती है आरती।
✍️ चिराग़ जैन
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