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आचरण श्रीराम जैसा

राजवैभव की नहीं है चाह कोई कीर्ति की, यश की नहीं परवाह कोई जय-पराजय की घड़ी में मन सहज हो शोक हो, भय हो, न हो उत्साह कोई राम, मुझको दो भले मत आवरण श्रीराम जैसा दे सको तो, दो मुझे बस आचरण श्रीराम जैसा जग जिसे पाषाण माने, देख लूँ मैं साँस उसकी जो नदी-तट पर खड़ा हो, जान...

मधुमास

खण्ड-खण्ड कर रहे देश की अखण्डता को, ऐसे दुष्ट लोगों का विनाश होना चाहिए जातिवादियों के जीवन में हलाहल घुले, साम्प्रदायिकों का सर्वनाश होना चाहिए ज्वालाएँ प्रचण्ड मेरे भारत में फिर जलें, एक-एक कोने में प्रकाश होना चाहिए न हो कोई जाति न धरम कोई शेष रहे, पूरे भारत में...

सरस्वती वंदना

हम सरिता सम बन जाएँ कविता-सरगम-ताल-राग के सागर में खो जाएँ सात सुरों के रंगमहल में साधक बनकर घूमंे नयनों से मलहार बहे माँ, दादर पर मन झूमे भोर भैरवी संग बिताएँ, सांझहु दीपक गाएँ हम सरिता सम बन जाएँ हे वीणा की धरिणी, हमको वीणामयी बना दो ज्ञानरूपिणी मेरे मन में ज्ञान की...

सरस्वती वन्दना

वरदान दे दे मुझे छंद-गीत-कविता का, वाग्देवी तेरा उपकार मांगता हूँ मैं रंग-ओ-तरंग तेरे संग से मिलेगा मुझे, जीवन में तेरे सुविचार मांगता हूँ मैं मृदु-सौम्य-भावपूर्ण वाणी बोलने के लिए वाणी तेरे सभ्य-संस्कार मांगता हूँ मैं वाणी का वरद् सुत बन के जिऊँ मैं यहाँ, हंसवाहिनी...
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