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क़हक़हे

बिल्कुल ख़ाली कर दिया है मैंने दिल का भरा-पूरा मकान आँखों की बाल्टी में आँसुओं का पानी भरकर धो डाला है मकान का एक-एक कोना …काफ़ी दिन हुए। लेकिन अब भी गूंजते हैं यादों के क़हक़हे टकराकर ख़ाली मकान की ख़ामोश दीवारों से। और मैं फिर से धोने लगता हूँ दिल के मकान की उदास...

जीवन दर्शन

मुझे गुलमोहरों के संग झरना आ गया होता किसी छोटे से तिनके पर उबरना आ गया होता तो मरते वक़्त मेरी आंख में आँसू नहीं होते कि जीना आ गया होता तो मरना आ गया होता ✍️ चिराग़...

माँ

माँ मैं तुझको क्या लिखूँ, सब तुझसे साकार जब-जब तू आशीष दे, तब-तब हो त्योहार ✍️ चिराग़ जैन

प्रेम-तीर्थ

मुम्बई में जुहू-चौपाटी पे शाम सात बजे बाद; परिवार संग नहीं जाना चाहिए आगरे में बालकों को ताज और प्रेमिका को पालिवाल गार्डन में घुमाना चाहिए बैंगलोर वाले लाल बाग़ जैसा कोई एक प्रेमियों को देश भर में ठिकाना चाहिए जहाँ पहले हैं, वहाँ और सुविधाएँ मिलें जहाँ पे नहीं हैं...
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