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बदलाव

जिसके चेहरे की पीड़ा को पढ़कर तुम बेचैन हुए थे उसकी आँखों के आँसू से तुमने कैसे आँख चुरा ली जिसकी हर इच्छा का बिरवा, तुमने साँसों से पोसा था उसकी चाहत के झूले से कैसे तुमने शाख़ चुरा ली सिसकी भरने से पहले ही, तुम दुलराने आ जाते थे दुनिया से मन ऊब न जाए, प्यार जताने आ...

मध्यम वर्ग का लॉकडाउन

किसने बोला काम करो घर बैठो, आराम करो कितना कुछ है मुमकिन देख घर पर बैठ बुलेटिन देख बहसों से कर टाइम पास कितने हैं अच्छे दिन देख भूख लगी हो ख़बरें खा ख़बरों से ही प्यास बुझा दिन भर अख़बारों को पढ़ फिर अख़बारों पर सो जा ख़बरों पर विश्राम करो घर बैठो आराम करो बाहर क़ाफ़ी गर्दी...

तृप्ति का एहसास

बात 2011 की है। उन दिनों मैं जम्मू में नौकरी करता था। पहली बार अपने घर से दूर, अकेला रह रहा था। सत्वारी के लक्ष्मी निवास में पेइंग गेस्ट की तरह रहता था। बिना बतियाए न रह पाने की आदत के कारण सप्ताहांत काटना पहाड़ जैसा लगता था। उस घर का आंगन बहुत बड़ा था। यह आंगन मेरे लिए...

सीधी सी बात

जो बड़ा होता है, उसे बताना नहीं पड़ता जिसे बताना पड़ता है, वो बड़ा नहीं होता जो अपना होता है, उसे सफ़ाई नहीं देनी पड़ती जिसे सफाई देनी पड़े, वो अपना नहीं होता ✍️ चिराग़...

राम मंदिर का मुहूर्त

रामजी ने जिस मुहूर्त में कोई शुभकार्य किया, ग्रहों के उसी संयोग को हम शुभ मुहूर्त मानते थे। आज राजनीति ने हमें इस कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है कि रामजी के मंदिर के लिए शुभ मुहूर्त का टंटा पड़ रहा है। अरे, उनका नाम लेकर तो जिस मुहूर्त में ईंट रख दो, वही शुभ है मूढ़ो! भूल...
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