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विरोध

देर तक खड़ा रिरियाता रहा बादल लेकिन नीम रूठा ही रहा न तो पाथेय दिया निंबोरी का न ही आंगन सँवारा नीमपुष्प से। लेट आए हो ना बदरा अब भुगतो भूख सहोगे तो समझोगे किसी की प्यास! ✍️ चिराग़...

जलोकड़ा

मौसम के मूड को तपा डालता है सूरज आग की तरहं ठण्डी हवा को बना डालता है लू। हरे पत्ते हो जाते हैं ज़र्द देख ही नहीं पाता किसी का सुख जलोकड़ा कहीं का! ✍️ चिराग़...
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