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निश्छल सौंदर्य

उससे नहीं मिलूँ तो मन में बेचैनी-सी रहती है उसकी आँखों में इक पावन देवनदी-सी बहती है उसके गोरे-नर्म गुलाबी पाँव बहुत ही सुंदर हैं उसकी बातें निश्छलता का ठहरा हुआ समुन्दर हैं उसकी वाणी मुझको सब वेदों से सच्ची लगती है उसकी मीठी-मीठी बातें कितनी अच्छी लगती हैं वो न जाने...
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