+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

पराश्रित प्रतिभा

द्रुपद से प्रतिशोध की आकांक्षा रखनेवाले द्रोण जब आश्रम की शुचिता में राजनीति का हस्तक्षेप स्वीकार कर लेते हैं तब केवल कुछ कर्ण और एकलव्य ही अन्याय का दंश झेलते हैं।
किन्तु यदि कोई प्रतिभाशाली कर्ण किसी भी परिस्थिति में अपनी निष्ठा के अश्व किसी दुर्योधन के द्वार पर बांध देते हैं तो पूरा युग कुरुक्षेत्र में आ खड़ा होता है।

पराश्रित प्रतिभा, चंदन की लकड़ी से बना कोयला है।

✍️ चिराग़ जैन

आँसू की आवाज़

जो रैली में पींग बढ़ाते नारों की
हालत देखो जाकर उन बेचारों की

इंसानों की बस्ती भूखी बैठी है
तुम बातें करते हो चाँद-सितारों की

आँसू की आवाज़ छुपाकर रख पाएँ
इतनी भी औक़ात कहाँ दीवारों की

लहरों से कश्ती का हाथ छुड़ाना है
हिम्मत बढ़ती जाती है पतवारों की

सिगरेट को इक बार बुझाना उंगली से
गर तासीर समझनी है अंगारों की

✍️ चिराग़ जैन

error: Content is protected !!