द्रुपद से प्रतिशोध की आकांक्षा रखनेवाले द्रोण जब आश्रम की शुचिता में राजनीति का हस्तक्षेप स्वीकार कर लेते हैं तब केवल कुछ कर्ण और एकलव्य ही अन्याय का दंश झेलते हैं। किन्तु यदि कोई प्रतिभाशाली कर्ण किसी भी परिस्थिति में अपनी निष्ठा के अश्व किसी दुर्योधन के द्वार पर...
जो रैली में पींग बढ़ाते नारों की हालत देखो जाकर उन बेचारों की इंसानों की बस्ती भूखी बैठी है तुम बातें करते हो चाँद-सितारों की आँसू की आवाज़ छुपाकर रख पाएँ इतनी भी औक़ात कहाँ दीवारों की लहरों से कश्ती का हाथ छुड़ाना है हिम्मत बढ़ती जाती है पतवारों की सिगरेट को इक बार...