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दिल में कोई कराह

बाक़ी नहीं है दिल में कोई कराह शायद मुद्दत हुई, हुए थे, हम भी तबाह शायद फिर से जहान वाले बदनाम कर रहे हैं फिर से हुई है हम पर उनकी निगाह शायद किस बात पर तू सबसे इतना ख़फ़ा-ख़फ़ा है तुझको कचोटता है तेरा गुनाह शायद फिर रेत पर लहू की बूंदें दिखाई दी हैं कोई ढूंढने चला है सहरा...

मुहब्बत हार जाती है

दिलों में पल रही चाहत सदा बेकार जाती है भला सोहनी कहाँ कच्चे घड़े पर पार जाती है वो लैला का फ़साना हो या फिर मेरी कहानी हो मुक़द्दर जीत जाता है, मुहब्बत हार जाती है ✍️ चिराग़...
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