Article, Bakodhyanam, Chirag Jain Writings, Prose
मीराबाई ने फेसबुक पर लिखा – ‘मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई’। लोगों ने इस पंक्ति को अपने-अपने स्टेटस पर चिपकाया। कुछ दिन बाद राणा ने मीराबाई के खि़लाफ़ एक पोस्ट लिखी। लोगों ने उस पोस्ट को देखते ही मीराबाई को ट्रोल करना शुरू कर दिया। कुछ क्रिएटिव लोगों ने फोटोशॉप करके मीराबाई की आपत्तिजनक फोटुएँ डालीं, कुछ कलाकारों ने डबिंग करके मीराबाई की अश्लील फोन कॉल का ऑडियो उपलब्ध करा दिया। कुलटा, बदचलन, चरित्रहीन, लूज़ कैरेक्टर, संस्कृति के लिए खतरा और न जाने क्या-क्या कहकर बेचारी के नाम पर अपने-अपने फॉलोवर्स बढ़ाते रहे। मीरा, अपमान का विष पीती रही और अंततः एक दिन अपनी प्रोफाइल डिलीट करके विलीन हो गई।
उसके मरते ही लोगों ने राणा को ट्रोल करना शुरू कर दिया। हत्यारा, प्रेम का दुश्मन, स्त्री विरोधी, नपुंसक, विलासी और न जाने क्या क्या कहकर राणा के बहाने अपने फॉलोवर्स बढ़ाने लगे। एक ने मीरा को देवी बताते हुए पेज बना लिया। एक ने मीराबाई सपोर्टर्स ग्रुप बना लिया। और एक ने तो इवेंट क्रिएट की – ‘कृष्ण भक्ति में डूबेगा फेसबुक, डिजिटल कीर्तन होगा, इवेंट टाइटल – मेरे तो गिरधर गोपाल!’
✍️ चिराग़ जैन
Chhookar Nikli Hai Bechaini, Chirag Jain Writings, Geet, Poetry
कल बना लेगा उदाहरण जग हमारे निर्णयों को
पर अभी हम आपके उपहास का संत्रास झेलें
कल हमारे अनुकरण की सीख देना पीढ़ियों को
आज हम अपने किये पर धृष्टता का त्रास झेलें
जब कभी गौतम नकारेगा गँधाती रीतियों को
तब उसे उद्दण्ड कहकर विश्व कर देगा बहिष्कृत
जब वही कृशकाय होकर लकड़ियों जैसा बनेगा
तब उसे गृहिणी करेगी देवता कहकर पुरस्कृत
स्वर्णबिंबित हो पुजेंगे कल तथागत विश्व भर में
आज भीषण जंगलों में कष्टप्रद संन्यास झेलें
जब किसी वैधव्य को जीवित चिता स्वीकार ना हो
तब उसे कुलटा बताकर राजगृह दुत्कार देंगे
बावरी जब कृष्ण की दीवानगी में मग्न होगी
तब नियम उसको गरल का पात्र देकर मार देंगे
कल तुम्हारी अर्चना का गान बन जाएंगी मीरा
आज भगवत भक्ति में वे दण्ड का विषग्रास झेलें
जग यही करता रहा है, जग यही करता रहेगा
अब जिसे द्रोही कहा है, कल उसे ईश्वर कहेगा
जिस कथा को हीन कहकर आज कर दोगे उपेक्षित
कल उसी पोथी से जग की आस्था का रस बहेगा
कल समूचा जग यही चौपाइयाँ गाता फिरेगा
आज तुलसी ज्ञानियों के दम्भ का परिहास झेलें
✍️ चिराग़ जैन
Chhookar Nikli Hai Bechaini, Chirag Jain Writings, Geet, Poetry
सभ्यताओं के क्षरण में
क्षोभ के वातावरण में
वेदना के मूल्य का अनुमान कमतर ही रहेगा
व्यस्तताओं को हृदय का भान कमतर ही रहेगा
मुद्रिका में प्रेम का क्षण तो सहेजा जाएगा पर
भूल जाएगा मिलन के सौख्य को दुष्यंत इक दिन
प्रीति की उजड़ी हुई क्यारी पुनः पुष्पित न होगी
हर कथा है नियत इक छोर पर तो अंत इक दिन
विष पिलाया जाएगा भी
गीत गाया जाएगा भी
बावरी की प्रीति से विज्ञान कमतर ही रहेगा
वेदना के मूल्य का अनुमान कमतर ही रहेगा
जीतकर लंका अवध को लौट आए राम लेकिन
जानकी के त्याग की लौ से हृदय जलता रहेगा
न्याय की वेदी जिसे अपनत्व कहकर ठग चुकी है
वो अहम संबंध मन की टीस बन गलता रहेगा
याद हर बाकी रहेगी
रात एकाकी रहेगी
इस पराभव का जगत् को ज्ञान कमतर ही रहेगा
वेदना के मूल्य का अनुमान कमतर ही रहेगा
जो नहीं सीखा अभी संवेदना से पार पाना
अपशकुन है उस धनंजय का महारण में उतरना
हाथ में गाण्डीव लेकर भी नयन जो नम करेगा
है नियत उसका निज अन्तर आत्मा के हाथ मरना
शस्त्र सब तूणीर में हो
और अंतस पीर में हो
तो शरों का लक्ष्य हित संधान कमतर ही रहेगा
वेदना के मूल्य का अनुमान कमतर ही रहेगा
साधना को भंग करने मेनकाएँ आएंगी ही
इंद्र लेंगे सत्यवादी की बहुत दुष्कर परीक्षा
हर सृजन की राह में शीशा बिछाया जाएगा फिर
युग करेगा सत्व की उपलब्धियों की भी समीक्षा
कष्ट के बादल फटेंगे
राह में पर्वत डटेंगे
आत्मबल के शौर्य से व्यवधान कमतर ही रहेगा
वेदना के मूल्य का अनुमान कमतर ही रहेगा
✍️ चिराग़ जैन
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मौन लम्हों को पकड़कर शब्द में साकार करना
भावसागर से अमिय का घट जुटाने-सा कठिन है
कल्पना में कौंधते लाखों विचारों से उलझना
इक उफनती बाढ़ को काबू में लाने-सा कठिन है
राम का दुःख तब कहा जब रह गए तुलसी अकेले
मेघदूतम् के रचयिता ने विरह के कष्ट झेले
कृष्ण की इक बावरी ने विष पिया जीवन गँवाया
सूर के अंधियार में ही रौशनी के खेल खेले
अनुभवों की देह छूकर, शब्द में जीवन पिरोना
साँस से अहसास की क़ीमत चुकाने सा कठिन है
दूसरों को बाँट कर देखो कभी अपना उजाला
क्यों कबीरा ने लुकाठी से घरौंदा फूँक डाला
सीकरी की भेंट ठुकराना निरी दीवानगी है
प्राण से प्यारी सुता खोकर बना कोई निराला
आँसुओं को आँख में ही रोक कर स्याही बनाना
धमनियों में वर्णमाला को बहाने-सा कठिन है
सो गया शहरे-अवध में रोते-रोते मीर कोई
फै़ज़ होने के लिए पहने रहा ज़ंजीर कोई
गै़र मुमकिन है बिना अनुभव के वारिस शाह होना
उस बशर ने खोई होगी ज़िन्दगी में हीर कोई
ज़ख़्म की हर टीस को दिलचस्प-सा क़िस्सा बनाना
चोट खाकर महफ़िलों में खिलखिलाने-सा कठिन है
गीत लिखकर गीत ऋषियों ने असीमित दर्द ढाँपा
शायरों को इल्म है किस शाख़ पर कब फूल काँपा
जेल की दीवार पर अशआर हिम्मत से लिखे पर
पुत्र के सिर का कलेवा कर नहीं पाया बुढ़ापा
भाव, पारे की तरह छूने नहीं देता स्वयं को
काव्य रचना ओसकण से घर बनाने-सा कठिन है
भावनाओं के प्रसव का मिल गया वरदान कवि को
अश्रु पीकर बाँटनी होगी सदा मुस्कान कवि को
मुश्क़िलों की हर परत को खोल कर छूना पड़ेगा
ज़िन्दगी मिलती भला कैसे बहुत आसान कवि को
एक जीवन में सभी की भावना को शब्द देना
हर पहर मरते हुए जीवन बिताने-सा कठिन है
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Ghanakshari, Poetry, Unpublished
भारत की पूर्णता का भान करने के लिए
वेद की ऋचाओं का सुज्ञान भी ज़रूरी है
मंदिरों की संध्या आरती के सुर मुख्य हैं तो
मस्जिदों से उठती अजान भी ज़रूरी है
कातिक, असौज, माघ, सावन भी अहम हैं
मीठी ईद वाला रमज़ान भी ज़रूरी है
नानक, कबीर, बुद्ध, महावीर, ईसामसीह
राम भी ज़रूरी, रहमान भी ज़रूरी है
मीरा का मुरारी, जसोदा का नंदलाल और
राधिका के सांवरे से कंत भी समान हैं
जन्म से मरण तक कोई-सा भी पंथ रहे
आदि भी समान और अंत भी समान हैं
बैरागी, फ़क़ीर, ब्रह्मचारी, त्यागी, पीर, बाबा
सिद्ध, ऋषि-मुनि, साधु-संत भी समान हैं
यंत्र भी समान, तंत्र-मंत्र भी समान और
भीतर से सारे धर्मग्रंथ भी समान हैं
झाड़-फूंक वाले टोने-टोटके भी अपने हैं
जड़ी-बूटी वाला वो इलाज भी हमारा है
शंख फूंकने से बाँसुरी की तान तक दक्ष
शस्त्र भी हमारा और साज भी हमारा है
शोणित के पान की परंपरा हमारी ही है
क्षमादान करता रिवाज़ भी हमारा है
गंगा जी का तट मणिकर्णिका हमारा ही है
जमुना किनारे बना ताज भी हमारा है
युध्द से विरक्त हो के संत जो बना था वीर
मौर्यवंशी शासक महान भी हमारा है
भोज, अकबर, शेरशाह, रणजीत, हर्ष,
महाराणा, पौरुष, चौहान भी हमारा है
भारतीय दर्शन जान के सुदर्शन
शून्य पे जो बोला था वो ज्ञान भी हमारा है
भारत हमारा, आर्यावर्त भी हमारा ही है
इंडिया हमारा, हिंदुस्तान भी हमारा है
✍️ चिराग़ जैन