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पराजित विजेता

आंधी के आघात सहे हैं ये शाखों के साथ बहे हैं सूखे हुए पड़े जो भू पर इनके कोमल गात रहे हैं हर मौसम से जूझे हैं ये, जूझे हैं, फिर टूट गए हैं ये उपवन के वो साथी हैं, जो शाखों से छूट गए हैं तूफानों का वेग सहा है, अब झोंकों से डरते हैं ये अपनी पूरी देह कँपाकर, उपवन में स्वर...

आत्मबल का अवलम्बन

जो कुछ इस समय घट रहा है, उसकी भरपाई कभी न हो सकेगी। मृत्यु ने समूची मानवजाति को दहला दिया है। मानव बस्तियों में अजीब-सा अमंगल छा गया है। सब मन ही मन अपने-अपने अपनों की गिनती करके इस संख्या के यथावत बने रहने की दुआ मांग रहे हैं। सब ऊपर ही ऊपर यह जता रहे हैं कि हमें कुछ...

सादगी की डगर

सत्य का पथ हमें क्यों जटिल सा लगा उम्र को झूठ में ढाल कर चल दिए सादगी की सुहानी डगर छोड़ कर ज़िन्दगानी फटेहाल कर चल दिए जो रवैया हमें पीर देता रहा क्यों उसी के लिए हम पुरस्कृत हुए ज़िन्दगी पर चढ़े पाप के आवरण पाठ जितने पढ़े सब तिरस्कृत हुए प्रश्न तो आत्मा ने उठाए मगर हम...

बँटवारा

जब से आंगन में हुए, दीवारों के ठाठ तब से महंगे हो गए, छोटे-छोटे बाट ✍️ चिराग़ जैन

दिल की ज़मीं

आज उस चेहरे पे मंज़िल की ख़ुशी भी देखी और उन आँखों में कल तक की नमी भी देखी लोग बस जिस्म तक आते थे चले जाते थे इक मगर तूने मेरे दिल की ज़मीं भी देखी ✍️ चिराग़...
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