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दुश्मनों के सर

काली अमावस का अंधेरा होम करने को, दीवाली के दीप सामधेनी बन जाएंगे पीड़ा वाली ज्वालाएँ जहाँ प्रचण्ड होंगी, वहाँ शांति-धार बरसाने प्रेम-घन जाएंगे बलिदान हुए यदि कहीं तेरे लाडले तो अरथी सजाने केसरी-सुमन जाएंगे पर यदि तलवार चली रणबाँकुरों की, शत्रुओं के शीश तेरी ही शरण...
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