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जो है वही कहना

किसी भी चोट को सहना बड़ा दुश्वार होता है जु़बां हो और चुप रहना बड़ा दुश्वार होता है ये माना दर्द को अभिव्यक्त करना भी ज़रूरी है मगर जो है वही कहना बड़ा दुश्वार होता है ✍️ चिराग़...

गुड्डी

गुड्डी के पापा लन्च में टिफ़िन खोलते समय मूंद लेते हैं आँखों को क्योंकि देख नहीं पाते हैं रोटियों से झाँकते तवे के सुराखों को। ईमानदार क्लर्क समझ नहीं सकता है क़िस्मत की गोटियों को इसलिए चुपचाप निगल लेता है बोलती हुई रोटियों को। गुड्डी अक्सर लेट पहुँचती है स्कूल नहीं...

कल की छोड़ो, कल का क्या है

ऐसा मत सोचो कि जब सब सोचेंगे तब सोचेंगे पहले हम सोचेंगे तब ही तो इक दिन सब सोचेंगे आख़िर बंदूकों से ही जब सारे काम निकलने हैं आयत रटने से क्या हासिल अहले-मक़तब सोचेंगे दो और दो को पाँच बनाने की तरक़ीबें क्या होंगीं इस उलझन का हल कुर्सी पर बैठे साहब सोचेंगे आज जिन्हें...
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