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अवसर

राज्य में नियम बना कि जो भी नागरिक राजा की आलोचना करेगा, उसे मृत्युदंड दिया जाएगा। भयभीत प्रजा मौन हो गई। एक दिन एक मंत्री ने राजा का मूड देखकर सलाह देने की हिम्मत की- “महाराज, यदि प्रजा के बोलने पर रोक लगी रही तो लोगों के भीतर-भीतर गुस्सा भर जाएगा। और इससे...

आवरण से आचरण तक

आवरण मात्र हैं वस्त्र आचरण नहीं! क्योंकि राम वैभव में भी राम ही रहे और वन में भी राम ही रहे लेकिन रावण वल्कल पहन कर भी नहीं हो सका साधु! ✍️ चिराग़...

उतरना

मैंने नाव से सीखा है कि तरने की प्रक्रिया प्रारंभ होती है उतरने से! ✍️ चिराग़ जैन

प्रवृत्ति

मिट्टी में क्षमता होती बीज की प्रवृत्ति बदलने की तो एक ही गुरुकुल में एक ही गुरु से पढ़कर सभी शिष्य युधिष्ठिर बन जातेे कोई दुर्योधन न बना होता ✍️ चिराग़...
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