+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

आवरण से आचरण तक

आवरण मात्र हैं वस्त्र
आचरण नहीं!
क्योंकि राम
वैभव में भी
राम ही रहे
और
वन में भी
राम ही रहे
लेकिन रावण
वल्कल पहन कर भी
नहीं हो सका
साधु!
✍️ चिराग़ जैन

प्रवृत्ति

मिट्टी में
क्षमता होती
बीज की प्रवृत्ति बदलने की
तो
एक ही गुरुकुल में
एक ही गुरु से पढ़कर
सभी शिष्य युधिष्ठिर बन जातेे
कोई दुर्योधन न बना होता

✍️ चिराग़ जैन

उजाला

दीपक ने दिखाया-
“मौन रहकर काम करो
दीर्घायु हो जाएगा
उजियारा।”

पटाखे ने सिखाया-
“धमाका करो
शोर मचाओ!
रौशनी से ज़्यादा ज़रूरी है
रौशनी की गूँज।”

मैं समझ गया
कि मानवता
क्यों रोकना चाहती है युद्ध
क्यों सजाना चाहती है आरती।

✍️ चिराग़ जैन

error: Content is protected !!