+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

धनतेरस का दीया

‘सुन! धनतेरस का दीया जोड़ रही हूँ। ध्यान रखियो बाहर मत आइयो।’ -कहते हुए हर साल धनतेरस पर दीपक बालती थी माँ। अगली सुबह चुरा लेता था मैं उस दीये के तेल में भीगा रुपैया। ‘क्यों रे ये दीये में से सवाया किसने उठाया’ ‘मुझे नहीं पता मम्मी मैंने तो दीया ही नहीं देखा आपने ही तो...
error: Content is protected !!