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विकास

अध्यापक: विकास का पागल होना क्या होता है? छात्र: जब Plant लगाने के लिए Tree काटे जाएं, तो इसे विकास का पागल होना कहते हैं। ✍️ चिराग़...

धरती के गहने हैं पेड़

रंग-बिरंगे पत्तोंवाले धरती के गहने हैं पेड़ मिट्टी के मटमैले तन पर पृथ्वी ने पहने हैं पेड़ क्यारी में ये फूल खिलाते ठण्डी-ठण्डी हवा चलाते धूप चुभे तो छाया लाते बारिश में छतरी बन जाते कभी फलों से लदती डाली कभी फूल लाते ख़ुशहाली साँस सुहाती गंध निराली आँखों को भाती हरियाली...

बोनसाई

आदेशों का दास नहीं है शाखा का आकार कभी ले तक सीमित मत करना पौधे का संसार कभी जड़ के पाँव नहीं पसरे तो, छाँव कहाँ से पाओगे जिस पर पंछी घर कर लें वो ठाँव कहाँ से लाओगे बालकनी में बंध पाया क्या, बरगद का विस्तार कभी कोंपल, बूटे, कलियाँ, डाली; ये सब कुछ आबाद रहे तब ही आती...

ग्लोबल वार्मिंग

मेघों का जल घट रहा, सूरज उगले आग धरती धू-धू जल रही, मानव अब तो जाग तप्त धरा, बादल विफल, गया संतुलन डोल रे मानव अब तो संभल, अब तो ऑंखें खोल मानव अब क्यों हो गया, आखिर बिल्कुल मौन तूने ही छलनी करी, दिव्य परत ओज़ोन तितली, धुरवा, बीजुरी, पाला, सावन, कूप धीरे-धीरे धर रहे,...
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