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कवि

एक जन्म की साधना या तपस्या कुछ रातों की व्यक्ति को नहीं बनाती है कवि। कविता के रूप में शब्दों को संजाने के लिये करनी पड़ती है तपस्या जन्मों तक तब कहीं जाकर कठिनाई से जन्मता है कवित्व। जानते हो? कवि के सामने रखी दवात में नहीं होती है स्याही ख़ून होता है। वही ख़ून जो जलता...
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