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सुभाषचंद बोस

जिनकी धमनियों में डोलता था ज्वालामुखी, मात-भारती के क्रांति-कोष कहाँ खो गए राष्ट्र-स्वाभिमान वाली मदिरा का पान कर होते थे जो लोग मदहोश; कहाँ खो गए जिस सिंह-गर्जना से बाजुएँ फड़कतीं थीं, इन्क़लाब वाले जय-घोष कहाँ खो गए देश को आज़ादी की अमोल सम्पदा थमा के, नेताजी सुभाषचन्द...

जीवन को कुछ यूँ जियो

बात यहीं से हो शुरू, और यहीं हो बन्द जीवन को कुछ यूँ जियो, जैसे दोहा छन्द ✍️ चिराग़ जैन

मज़ा उनको भी आता है

अजब सी बात होती है मुहब्बत के तराने में क़तल दर क़त्ल होते हैं सनम के मुस्कुराने में मज़ा हमको भी आता है मज़ा उनको भी आता है उन्हें नज़रें चुराने में हमें नज़रें मिलाने में ✍️ चिराग़...
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