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दीपावली

जीवन बाती से जुड़े, पुरुषार्थों की आग। हर आंगन संदीप्त हो, जाय अंधेरा भाग ॥ दिव्य-दिव्य हों कल्पना, दिव्य-दिव्य हों रंग। दिव्य अल्पनाएँ बनें, हों सब दिव्य प्रसंग ॥ पावन पुष्पों से गुँथें, ऐसे बन्धनवार। जिन्हें लगाकर सज उठें, सबके तोरणद्वार ॥ भोर समीरों में घुलें, गेंदे...

व्यस्तता

जब तक तुम संग थीं मैंने नहीं तलाशी कोई ख़ुशी नहीं खोजी कोई मुस्कान नहीं ढूँढ़ी कोई हँसी …ज़रूरत ही नहीं पड़ी। अब तलाशता फिरता हूँ एक-मासूम सी ख़ुशी अपने दिल के लिये। एक कोमल-सी मुस्कान अपने होंठों के लिये। एक गीली-सी हँसी अपने चेहरे के लिये। और एक पावन-सी चमक अपनी...

कुछ तो होगी बात

रावण के व्यक्तित्व में, कुछ तो होगी बात जिसे मारने जन्म लें, तीन लोक के नाथ ✍️ चिराग़ जैन
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