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धैर्य

हे अर्जुन, सूर्यास्त को देखकर न धैर्य छोड़ो, न धनुष; हो सकता है सूर्य गया हो जयद्रथ को बुलाने! ✍️ चिराग़...

कृष्ण का तो चक्र भी ‘सुदर्शन’ है

नंदलला, कन्हैया, कान्हा, गिरिधर, मुरलीधर, गोपाल, मोहन, गोविन्द, मधुसूदन, केशव, रणछोड़, माधव, श्याम, वासुदेव, पीताम्बर… और भी दर्जनों संज्ञाएँ मिलकर थोड़ी-थोड़ी झलक भर दे पाती हैं एक कृष्ण की। और ये सब संज्ञाएँ कृष्ण के नाम भर नहीं हैं, अपितु ये सब नाम कृष्ण के जीवन...

आशाओं पर आघात

पतझर का आना निश्चित था पत्ते झर जाना निश्चित था हरियाली की आशाओं पर, बादल ने आघात करा है आँगन में जो ठूठ खड़ा है, वो सावन के हाथ मरा है दुःशासन ने चीर हरा तो ठीक समय आ पहुँचे माधव भीष्म काल बनकर बरसे तो तोड़ प्रतिज्ञा पहुँचे माधव एकाकी होकर जूझा अभिमन्यु अकेला...

वृंदावन की याद

दुनिया का सारा वैभव है राजमहल की सुविधाओं में फिर भी कान्हा को रह-रह कर वृंदावन की याद आती है सोने-चांदी में भरकर जब इत्र बरसता है राहों में मन को गोकुल के सीधे-सादे सावन की याद आती है जब राजा के सैनिक घर से सारा माखन ले जाते थे हम पानी के साथ चने खाकर तकते ही रह जाते...

कृष्ण हो पाना कठिन है

रीतियों को तोड़ने का बल जुटा पाना कठिन है बल जुटा लो तो सभी से बात मनवाना कठिन है तर्जनी पर न्याय ठहराना कठिन है रे। कृष्ण हो पाना कठिन है रे। हर किसी की पीर का संज्ञान होना खेल है क्या शब्दहीना आस का अनुमान होना खेल है क्या प्रश्न, जिज्ञासा, शिक़ायत ही मिलें सबके नयन...
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