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दशहरा

दुष्टों का संहार कर, संतों पर कर गर्व यही सीख सिखला रहा, हमें दशहरा पर्व ✍️ चिराग़ जैन

सुन्दरी

कारे-कारे कजरारे नैन तोरे प्यारे-प्यारे गीले-गीले लागत हैं नदिया के कूल से सौंधी-सौंधी खुसबू महकती है केसन में मानो अभी नहा के आई हो गोरी धूल से मस्तानी की दीवानी मुस्कान देख लें तो रोम-रोम खिले गुलदाऊदी के फूल से मीठी-मीठी बोली, मो से बोले तो मिठाई लागे औरन से बोले...

प्यार वाला अहसास

प्यार वाला एक अहसास जब से जगा है अँखियों से भेद खोलती है मेरी ज़िन्दगी हर घड़ी हर पल दिन-रैन बिन चैन उस ही का नाम बोलती है मेरी ज़िन्दगी अपना तो दिल भूल आई किसी आँचल में अब बावरी-सी डोलती है मेरी ज़िन्दगी मथुरा में बन बनवारी बैठ गई और बृज की हवा टटोलती है मेरी ज़िन्दगी ✍️...
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