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मुझे तुम भूल सकते थे

फ़ज़ाई रक्स होता तो मुझे तुम भूल सकते थे तुम्हारा अक्स होता तो मुझे तुम भूल सकते थे तुम्हारी चाह हूँ, आदत, इबादत हूँ, मुहब्बत हूँ महज इक शख़्स होता तो मुझे तुम भूल सकते थे ✍️ चिराग़...

दिल के अरमान हैं

लफ़्ज़ आँखों के किनारों पे ठहर जाते हैं अश्क़ होठों पे हँसी बन के बिखर जाते हैं ये ज़माना जिन्हें अशआर कहा करता है दिल के अरमान हैं काग़ज़ पे उतर जाते हैं ✍️ चिराग़...

गीत लिखते वक़्त

इक दफ़ा पलकों को अश्क़ों में भिगो लेते हैं हम और फिर अधरों पे इक मुस्कान बो लेते हैं हम गीत गाते वक्त रुंध ना जाए स्वर इसके लिए गीत लिखते वक्त ही जी भर के रो लेते हैं हम ✍️ चिराग़...

याद

कभी जब नीम की डाली पे चिड़ियाँ चहचहाती हैं हज़ारों ख्वाहिशें दिल में तड़पकर कुलबुलाती हैं मेरे आगे से जब भी ख़ुशनुमा मंज़र गुज़रते हैं किसी की याद में भरकर ये आँखें छलछलाती हैं ✍️ चिराग़...
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