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कहाँ शुरू कहाँ ख़त्म

“मुझसे पूछा नहीं” – यह भाव किसी की भी नाराज़गी का सहज कारण हो सकता है। बल्कि यह कहा जाए कि दुनिया भर की सारी शिकायतों का अध्ययन किया जाए तो 70-80 प्रतिशत शिकायतों के मूल में यह भाव मिलेगा। पहली बार इस भाव को सीधे-सीधे अभिव्यक्त करती हुई एक फिल्म आई...

आधुनिकता और संस्कार

छोटी बहू के घूंघट न काढ़ने की आदत सासू को अखरती है और बड़ी बहू लम्बे से घूंघट में मोबाइल छिपाकर आराम से वीडियो काॅल करती है ✍️ चिराग़...

विज्ञान

वास्तविकता साकार हो चुकी कल्पना है और कल्पना साकार होने जा रही वास्तविकता है। ✍️ चिराग़ जैन

भाजपा आ गई

एक समय था जब मीडिया वाले भी सच बोलते थे सरकारी घोषणाओं की कलई खोलते थे फिर हर तरफ बस एक ही तस्वीर छा गई क्योंकि देश में भाजपा आ गई विश्वास करो भाईसाहब पैट्रोल पंप पर सिर्फ़ ईंधन का व्यापार होता था फिर आ गई भाजपा अब वहाँ भी साहिब का प्रचार होता था ईडी और सीबीआई...
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