+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

सियासत पनप रही है

नसीहतें अनसुनी रहेंगी, यही रवायत पनप रही है पुरानी आफ़त तो टल गई पर नई मुसीबत पनप रही है कहीं तिज़ारत, कहीं ज़रूरत, कहीं पे वहशत पनप रही है अमां हटाओ भी दौरे-नौ में कहाँ शराफ़त पनप रही है इधर मेरे घर में एक नन्हीं, हसीं नज़ाक़त पनप रही है उधर मेरे मन में सुर्ख़ियों की तमाम...

सबके हालात से मतलब

मेरे बारे में कौन क्या बोला मुझको इस बात से मतलब क्या है अपने जज़्बात से मतलब रखूं सबके हालात से मतलब क्या है ✍️ चिराग़...
error: Content is protected !!