सीधी सी बात
जो बड़ा होता है, उसे बताना नहीं पड़ता
जिसे बताना पड़ता है, वो बड़ा नहीं होता
जो अपना होता है, उसे सफ़ाई नहीं देनी पड़ती
जिसे सफाई देनी पड़े, वो अपना नहीं होता
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
जो बड़ा होता है, उसे बताना नहीं पड़ता
जिसे बताना पड़ता है, वो बड़ा नहीं होता
जो अपना होता है, उसे सफ़ाई नहीं देनी पड़ती
जिसे सफाई देनी पड़े, वो अपना नहीं होता
✍️ चिराग़ जैन
Chhookar Nikli Hai Bechaini, Chirag Jain Writings, Geet, Poetry
अपने स्वर्ण सरीखे शब्दों में मैं अगर मिलावट कर लूँ
तो चमकीले पत्थर मेरे भी जीवन में जड़ जाएंगे
कुंदन जैसे शुद्ध विचारों में कुछ समझौता घुल जाए
तो मेरे हित नित्य सफलता के आभूषण गढ़ जाएंगे
चंदन कहकर कीकर बेचूँ -लाभ यही है, मंत्र यही है
लोभ प्रपंचों की दुनिया में धर्म यही है, तंत्र यही है
लेकिन ऐसी विजय पताका किन हाथों से फहराऊंगा
दर्पण के सम्मुख आया तो मैं कैसे मुख दिखलाऊँगा
जिस दिन मेरा पेट विवश कर देगा गर्दन के झुकने को
उस दिन मेरी ख़ुद्दारी के दावे झूठे पड़ जाएंगे
नैतिक शिक्षा की पुस्तक का ज्ञान भुलाना आवश्यक है
अपने आदर्शों के शव का कुचला जाना आवश्यक है
भौतिक सुख की नीरस आँखों में काजल शोभा पाएगा
लेकिन अपने अंतर्मन की भस्म बनाना आवश्यक है
मानव का तन कोरा शव है, शेष न हो यदि लाज ज़रा भी
दैहिक सुख तो यहाँ धरा पर पड़े-पड़े ही सड़ जाएंगे
महल-दुमहलों की रंगत से, नेह भरा छप्पर बेहतर है
रेशम के महंगे चोगों से कबिरा की चादर बेहतर है
भीष्म पितामह के सीने पर बाण चलाते अर्जुन से तो
पुत्रविरह में कट कर गिरता द्रोण तुम्हारा सिर बेहतर है
आश्रम में रहकर संन्यासी संबंधों की लाज रखेंगे
महलों में रहकर दो भाई आपस में ही लड़ जाएंगे
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Muktak, Poetry
अपने क़द के भीतर रहकर मिलते थे
नाराज़ों से आप सुलह कर मिलते थे
हम तो उनसे उस मुद्दत से वाकिफ़ हैं
जब वो हमको अपना कहकर मिलते थे
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Do Misron Ke Beech, Ghazal, Poetry
सभी होठों पे इक मुस्कान धरता है लतीफ़ा
हरेक महफ़िल में सुन्दर रंग भरता है लतीफ़ा
किसी मनहूस के कानों में पड़कर घुंट न जाए
इसी इक बात से हर रात डरता है लतीफ़ा
गली, नुक्कड़, सफ़र, महफ़िल, महोत्सव और दफ़्तर
अमां हर मोड़ से खुलकर गुज़रता है लतीफ़ा
उछलता है, हंसाता है, ख़ुशी देता है सबको
भला बदले में कब कुछ मांग करता है लतीफ़ा
लतीफ़े का अगर भावार्थ समझाना पड़े तो
अरे इस हाल में तिल-तिल के मरता है लतीफ़ा
लतीफ़ागोई के उस्ताद ही ये जानते हैं
बड़ी मुश्क़िल से होंठों पर संवरता है लतीफ़ा
लतीफ़े यूज़ करके जो लतीफ़े को हिकारें
उन्हीं लोगों की संगत से सिहरता है लतीफ़ा
✍️ चिराग़ जैन
Chhookar Nikli Hai Bechaini, Chirag Jain Writings, Geet, Poetry
सिर्फ अपने किसी स्वार्थ को साधने
मैं दिखावा कभी भी न कर पाउँगा
मैं ग़लत को ग़लत ही कहूँगा सदा
झूठ बोला कभी तो बिखर जाउँगा
बस किसी एक झूठी ख़ुशी के लिए
भ्रम तुम्हें सौंप दूँ ज़िन्दगी के लिए
सत्य तो सत्य ही है सभी के लिए
अब बुरा होउंगा कल सँवर जाउंगा
आज कर्तव्य गर ये निभाऊँ नहीं
भ्रम तुम्हारा अगर तोड़ पाऊँ नहीं
और ख़ुद से नज़र मैं मिलाऊँ मैं
कुछ ठिकाना नहीं फिर किधर जाउंगा
यूँ अगर आज रिश्ता निभाना पड़े
हर किसी बात पर सिर झुकाना पड़े
सच समझते हुए मुँह चुराना पड़े
तन जियेगा मगर मन से मर जाऊंगा
आज तुमको अगर पा लिया झूठ से
दोस्ती का दिखावा किया झूठ से
गर तुम्हें आज बहला लिया झूठ से
देखना एक दिन मैं मुकर जाऊंगा
✍️ चिराग़ जैन