ख़र्च : एक झरोखा
ख़र्चा करते समय इधर-इधर देखनेवाला या तो डाकू से भयभीत होता है या फिर ख़ुद चोर होता है।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
ख़र्चा करते समय इधर-इधर देखनेवाला या तो डाकू से भयभीत होता है या फिर ख़ुद चोर होता है।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
परिपक्वता एक सिद्धि है जो थोड़े नैष्ठुर्य, थोड़ी कायरता और थोड़ी निर्लज्जता की साधना से प्राप्त होती है।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
जब Plant लगाने के लिए Tree काटे जाएं, तो इसे विकास का पागल होना कहते हैं।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
कमाने में इतने व्यस्त न हो जाना कि ख़र्चने के लिए समय ही न बचे। क्योंकि अपनी ज़िन्दगी के मालिक आप ख़र्चते समय होते हैं; कमाते समय तो श्रमिक होते हैं।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
स्वाभिमान जब दूसरों को नीचा दिखाने का प्रयास करने लगे, तब वह कोरा अभिमान बनकर रह जाता है।
✍️ चिराग़ जैन
Chirag Jain Writings, Naavik ke teer, Prose, Quotation
‘अथाह’ होने की आकांक्षा ही जीवन में ‘आह’ के अध्याय का ‘अथ’ बन जाती है।
✍️ चिराग़ जैन
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