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सपने कभी नहीं मरते

बचपन में मेरी मजबूरियों ने मुझसे कुछ सपने छीनकर फेंक दिये थे ज़मीन पर कुछ समय तक देखता रहा मैं उन्हें दूर से ही फिर उन पर चढ़ गयीं कई परतें …व्यस्तताओं की …समय की …और बेख्याली की मुझे लगा कि समा गये हैं वे सब सपने क़ब्र में। लेकिन मैं ग़लत था बीते कुछ...

प्रतीक्षा

कब उगेगा दिन, तुम्हारे आगमन का मैं बहुत दिन से प्रतीक्षा कर रहा हूँ कब कोई आकार होगा इस सपन का मैं बहुत दिन से प्रतीक्षा कर रहा हूँ मैं युगों से रोज़ लिख-लिखकर संदेशे बादलों के हाथ भेजे जा रहा हूँ शुद्धतम जल से चरण धोऊँ तुम्हारे आँसुओं को भी सहेजे जा रहा हूँ कब मुझे...

विचारधारा

विचारधारा वह बोझा है, जो योग्य पात्रों पर लादकर कुम्हार हाथ हिलाते हुए ‘इधर-उधर’ विचरते रहते हैं। ✍️ चिराग़...

कोरोना में अवसर

कोरोना की दूसरी लहर बीत चुकी है, लेकिन राजनीति में ख़ुशी की लहर नहीं आई। वे अब भी आपस में लड़ रहे हैं। जब देश में कोरोना का ताण्डव चल रहा था तो पॉलिटिकल पार्टियों में इस बात पर लड़ाई थी कि ये जनता तुम्हारी है, इसे तुम बचाओ। अब जब ताण्डव शान्त हुआ है तो हर पार्टी यह...

वो सुबह कभी न आए!

उस दिन सुबह जब आँख खुली तो पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गयी। मोबाइल पर आदित्य जी की मृत्यु का समाचार था। तब सोशल मीडिया इतना एक्टिव नहीं था। सो, परस्पर फोन से ही सूचनाएँ मिल पाती थीं। कुछ कवियों को फोन मिला तो पता चला कि दुनिया लुट चुकी है। रात को जो कवि-कुनबा उत्सवों...
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