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सांस्कृतिक ह्रास

संस्कार अवरोही हो चुके हैं। मेरे पिता का संहनन मुझमें नहीं है। और मैं इस बात के लिए भी आश्वस्त हूँ कि मेरी संतति मेरे जीवन सिद्धान्तों को पुराना कहकर नकार देगी। पीढ़ियों का यह अनवरत संघर्ष हमें बैलगाड़ियों से अंतरिक्ष यान तक भी लाया है और नाड़ी विज्ञान से पैथोलॉजी लैब तक...

सवेरों का निरादर

यूँ तो हम युग के शिलालेखों पे अंकित हो गए जो जिए हमने वो सारे दिन अलंकृत हो गए किन्तु जब युग की टहनियों पर नई कोंपल उगी तो हरे पत्ते हवाओं से सशंकित हो गए जब हमारी श्वास में सरगम सजी आनन्द था हम उठे, जग ने गई रस्में तजीं आनन्द था जब हमारी गुनगुनाहट राग बनकर पुज गई...
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