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गिद्धों में मुठभेड़ हुई है

नभ तक वीराना पसरा है हर मन में गहमागहमी है गिद्धों में मुठभेड़ हुई है पर चिड़िया सहमी-सहमी है सबके मुँह पर ख़ून पुता है, नाखूनों में मांस भरा है पर भोली चिड़िया के भीतर, दहशत का एहसास भरा है इसने उसकी चिड़िया मारी, उसने इसकी चिड़िया खाई खूब लड़े फिर समझौतों में,...

सृजन सुख

इस तपोवन में सृजन की साधनाएँ चल रही हैं ध्वंस से कह दो यहाँ उसके लिए अवसर नहीं है मन गहन संवेदना अनुभूत करने में जुटा है तन अभी स्वर-व्यंजनों में प्राण भरने में जुटा है भाव का उत्कर्ष छूकर नयन खारे हो रहे हैं इस सृजन सुख में जगत् के डर किनारे हो रहे हैं शब्द से सच का...

कुलगीत IIIT Vadodara

उन्नत शिक्षा हेतु समर्पित इस धरती का अभिनंदन इस परिसर से ज्ञान प्रसारित इसके कण-कण का वंदन जननी-तनय सरीखे ही हैं, आवश्यकता-आविष्कार अनुभव का अवलंबन थामे बढ़ता अधुनातन आचार भौतिकता के चक्र, कल्पना-अश्व, साधना का स्यंदन इस परिसर से ज्ञान प्रसारित इसके कण-कण का वंदन...

अतीत से सामना

सामने आ गए आज फिर हम आज फिर से संभलना पड़ेगा एक-दूजे से ख़तरा नहीं है ख़ुद से बच के निकलना पड़ेगा आँख से तुम बरसने न दो बदलियाँ काँपकर सब बयां कर न दें उंगलियाँ चल न आना मेरी ओर सब भूलकर बोलने लग न जाएँ कहीं पुतलियाँ नेह को कब दिखी कोई सीमा देह को ही समझना पड़ेगा...

मन बोलता है

जब सब पंछी मौन हो गए कलरव के स्वर गौण हो गए जीवन की रफ़्तार सो गई दिन पर रात सवार हो गई ऐसा एकाकी पल पाकर मन हमको झकझोर उठा जब बाहर सन्नाटा पसरा, तब अन्तर में शोर उठा कितनी इच्छाएँ प्यासी थीं, कितने काम अधूरे निकले डुगडुगियों पर नाच रहे थे, हम तो एक जमूरे निकले कर को...

पराजित विजेता

आंधी के आघात सहे हैं ये शाखों के साथ बहे हैं सूखे हुए पड़े जो भू पर इनके कोमल गात रहे हैं हर मौसम से जूझे हैं ये, जूझे हैं, फिर टूट गए हैं ये उपवन के वो साथी हैं, जो शाखों से छूट गए हैं तूफानों का वेग सहा है, अब झोंकों से डरते हैं ये अपनी पूरी देह कँपाकर, उपवन में स्वर...
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