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सादगी की डगर

सत्य का पथ हमें क्यों जटिल सा लगा उम्र को झूठ में ढाल कर चल दिए सादगी की सुहानी डगर छोड़ कर ज़िन्दगानी फटेहाल कर चल दिए जो रवैया हमें पीर देता रहा क्यों उसी के लिए हम पुरस्कृत हुए ज़िन्दगी पर चढ़े पाप के आवरण पाठ जितने पढ़े सब तिरस्कृत हुए प्रश्न तो आत्मा ने उठाए मगर हम...

बुरा मानने वाले लोग

हर आदमी के जीवन में तीन तरह के लोग होते हैं एक जानने वाले एक पहचानने वाले एक बुरा मानने वाले जानने वाले लोग जीवन को बहाव देते हैं पहचानने वाले गाहे-बगाहे भाव देते हैं और बुरा मानने वाले हमेशा तनाव देते हैं। जानने वाले लोग ज़िन्दगी की डोर होते हैं पहचानने वाले बेमतलब का...

आहट

वो तुमसे मेरी पहली मुलाक़ात थी और सिर्फ़ तुम जानती थीं कि आख़िरी भी…! स्टेशन पर खड़े चिड़चिड़ा रहे थे सभी लोग कि ट्रेन लेट क्यों हो रही है और हर आहट के साथ सहम जाता था मैं -’हाय राम! कहीं गाड़ी तो नहीं आ रही!’ ✍️ चिराग़...

शरद पूर्णिमा

शरद रात्रि का चंद्रमा, किसे सुनावे पीर ना जमना में नीर है, ना अंगना में खीर सखी! शरद की पूर्णिमा, मन हो गया अधीर मैं तरसूं निज श्याम को, दुनिया खाए खीर ✍️ चिराग़...

मुहब्बत सबको होती है

बहुत ज़्यादा न हो पर कुछ तो हसरत सबको होती है जहाँ में नाम और शोहरत की चाहत सबको होती है मरासिम हर दफ़ा ताज़िन्दगी निभता नहीं लेकिन किसी से इक दफ़ा सच्ची मुहब्बत सबको होती है मन अपने आप से भी इक ना इक दिन ऊब जाता है किसी अपने की दुनिया में ज़रूरत सबको होती है हर इक मुज़रिम...
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