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बचपन नहीं जाता

अगर कुछ शोख़ियों की ओर उसका मन नहीं जाता तो फिर इंसान के मन से कभी बचपन नहीं जाता कोई कितना भी ख़ुद को सख्त दिल कहता रहे लेकिन कभी यादों से पहले प्यार का सावन नहीं जाता भले ही मिट गया दीवार का नामो-निशां भी अब मगर मेरे ज़ेह्न से वो बँटा आंगन नहीं जाता चुभन ही क्यों बहुत...

शायरी

शायरी इक शरारत भरी शाम है हर सुख़न इक छलकता हुआ जाम है जब ये प्याले ग़ज़ल के पिए तो लगा मयक़दा तो बिना बात बदनाम है ✍️ चिराग़...
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