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ख़रीददार

वेदियाँ बाज़ार में आ तो गई हैं किंतु फिर भी सिर्फ़ दौलत से इन्हें पाना अभी मुम्किन नहीं है हर गुज़रता शख़्स इनके दाम पूछेगा यक़ीनन हर किसी के हाथ बिक जाना अभी मुम्किन नहीं है हाथ में अमृत लिए धन्वंतरि आ ही गए हैं पर अमरता के लिए संग्राम होना है ज़रूरी हाँ, कई राजा उपस्थित...

वो निर्णय किस काम का

सब बातों पर ध्यान न देना हर निंदा को कान न देना इक पल की इच्छा पूरी कर इक युग को अपमान न देना धोबी ने कब आकर पूछा हाल अकेले राम का जो जीवन भर की पीड़ा दे, वो निर्णय किस काम का जग की निंदा से चिंतित हो, कोख जने को तज दोगे क्या रश्मिरथी के उज्ज्वल पथ पर, मन भर पीड़ा रच...
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