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ऋतुराज आया है

बाग की सब क्यारियों के हाथ पीले हो गए हैं फूल की हर पाँखुरी के ओंठ गीले हो गए हैं श्वास में सरगम सजाता साज आया है लग रहा है द्वार पर ऋतुराज आया है साँस में बहकी हवाओं का नशा सा घुल रहा है प्रीति की बारिश हुई है, ज्ञान सारा धुल रहा है पर्वतों को खुशबुओं ने प्यार से छू...
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