+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

व्यक्तित्व

एक अज्ञात कलाकार ने हवा में कुछ लकीरें बनायीं कुछ खड़ी रेखाएँ जैसे भृकुटि के मध्य त्यौरियाँ पड़ती हैं कुछ आड़ी रेखाएँ जैसे ललाट पर बौद्धिकता उभरती है। कुछ अर्द्धवृत्ताकार जैसे नयनों के नीचे की चिन्ताएँ कुछ हल्की पनियाई जैसे आँखों की कोरों पर तैरती इच्छाएँ कुछ होंठों पर...

संवाद कविता

आगे के सफ़हों पर जो कुछ है वह भी है तो गोमुख निसृत गंगाजल ही, लेकिन इसका संचय जिस पात्र में किया गया है वह किंचित आधुनिक है। यह खण्ड फेसबुक पर हुई चर्चाओं का यथावत् संकलन है। इसमें मित्रों से हुई काव्यात्मक चैटिंग को जस का तस समायोजित किया गया है। इस खण्ड में केवल...
error: Content is protected !!