+91 8090904560 chiragblog@gmail.com

असफल मुर्दनी

पिछले रविवार को मेरे एक परिचित का फोन आया कि उनके पिताजी का स्वर्गवास हो गया है। यह और बात है कि मैंने कभी उनके पिताजी को देखा नहीं था लेकिन फिर भी परंपरानुसार मैंने फोन पर उन्हें यह जताने की हर संभव कोषिष की कि उनके पिताजी के निधन के इस आकस्मिक समाचार से मैं...

तो भी मैं ग़लत

मैं अगर ख़ुद अपना सच बतलाऊँ तो भी मैं ग़लत और अगर हर झूठ को सह जाऊँ तो भी मैं ग़लत ग़र तुम्हारे वार से मर जाऊँ तो भी मैं ग़लत और अगर ख़ुद को बचाना चाहूँ तो भी मैं ग़लत बेअबद हूँ मैं अगर बेहतर करूँ कुछ आपसे और गर बेहतर नहीं कर पाऊँ तो भी मैं ग़लत बेवजह अपशब्द कहने की मुझे आदत...

एक जिल्द में बांध दो

एक संग आकर कहें, कातिक औ’ रमज़ान एक जिल्द में बांध दो, गीता और कुरान ✍️ चिराग़ जैन
error: Content is protected !!