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अपनों से हारा लालकिला

जब लालकिला बदरंग हुआ हथियार चले हुड़दंग हुआ उस दिन पानी-पानी क्यों था सारा का सारा लालकिला अपनों से हारा लालकिला इस लालकिले ने कितने ही तख़्तों की उलट-पलट देखी साज़िश देखीं, धोखे देखे, इतिहासों की करवट देखी जब भी कोई दुश्मन आया, तब-तब हुंकारा लालकिला अपनों से हारा...

लड़ाई की संभावनाएं

सुर-असुर; शैव-वैष्णव; कौरव-पाण्डव; आर्य-द्रविड़, बौद्ध-वैष्णव, जैन-बौद्ध, हिन्दू-मुस्लिम, भारतीय-अंग्रेज, ऊँच-नीच और अमीर-ग़रीब का परस्पर संघर्ष तो समझ लिया हमने! लेकिन रजवाड़े आपस में क्यों लड़े, मराठा-पेशवाओं में आपसी संघर्ष क्यों था, मुग़ल आपस में क्यों एक न हुए, मौर्यो...

गौरक्षा की दुहाई

विषय लज्जा से कहीं आगे निकल चला है। एक शब्द पकड़ कर उसका कैसा-कैसा प्रयोग किया जा सकता है ये सच पिछले दो दिन में बेहद घृणास्पद चेहरे के साथ बार-बार सामने से गुज़रा है। अफ़वाह तंत्र कितना शक्तिशाली और भयावह है, इस बात के प्रमाण पिछ्ले 48 घंटों से अनवरत मिलते जा रहे हैं।...

दंगे

बाज़ी बिछी हुई है और दांव हैं दंगे होते हों, आदमी पे अगर घाव हैं दंगे कुछ लोग हैं बेचैन सियासत की भूख से जिस पर सिकेगी रोटी वो अलाव हैं दंगे ✍️ चिराग़...

जश्न को चीखों में बदला है

नई नस्लों को हमने ख़ुद गुनहगारों में बदला है हँसी को टीस में और जश्न को चीखों में बदला है जिन्हें पुरखों ने ख़ुश होने की ख़ातिर हमको सौंपा था उन्हीं मौकों को हमने जंग की वजहों में बदला है ✍️ चिराग़...
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