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नेपाल भूकंप त्रासदी

ईश्वर के एक इशारे पर मानवता दहल गई सारी लेकिन मानव की जिजीविषा पल भर भी हिम्मत कब हारी धरती डोली, हड़कंप मचा ईश्वर ने यह भूकंप रचा भय, शोक, करुण-चीखें, पुकार मानव मन काँपा बार-बार क्षण भर में भीषण वज्रपात धन-जन हानि और प्राणघात लेकिन अगले ही पल मानव भरकर भीषण हुंकार...

सोशल मीडिया

फेसबुक पर छा गए लिक्खाड़ लिखते हैं दनादन हर किसी मुद्दे पे इनकी राय है तैयार बहुत बेख़ौफ़ लिखते हैं इन्हें लिखे हुए शब्दों की ताक़त का कोई आभास तो हो इन्हें मालूम हो इनकी बिना सोची हुई हर बात पल भर में किसी की साख पर बट्टा लगाती है हवस-सी हो गई है सबसे पहले अपनी एफबी वॉल...

ज़िंदगी

सादगी के आँगन में चहकी है, खेली है हाव-भाव बदले तो ज़िंदगी अकेली है ओढ़ी हुई बातों से कष्ट में धकेली है सहजता सफलता की पक्की सहेली है एक तरफ़ जकड़न है क़ातिल शिकंजा है नाख़ूनी रंजिश है नफ़रत है, पंजा है उसी के ज़रा पीछे प्यार की हवेली है सहजता से खुली हुई गुदगुदी हथेली है...

सवेरों का निरादर

यूँ तो हम युग के शिलालेखों पे अंकित हो गए जो जिए हमने वो सारे दिन अलंकृत हो गए किन्तु जब युग की टहनियों पर नई कोंपल उगी तो हरे पत्ते हवाओं से सशंकित हो गए जब हमारी श्वास में सरगम सजी आनन्द था हम उठे, जग ने गई रस्में तजीं आनन्द था जब हमारी गुनगुनाहट राग बनकर पुज गई...
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