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आचार्य विद्यासागर की समाधि

सभी का मन सशंकित हो रहा था बहुत दिन से कहीं कुछ खो रहा था जुड़े सब हाथ ढीले पड़ गए थे पनीले नेत्र पीले पड़ गए थे तपस्या चरम तक आने लगी थी ये भौतिक चर्म कुम्हलाने लगी थी व्रतों पर नूर इतना चढ़ गया था कि तन का रंग फीका पड़ गया था हुई जर्जर तपस्यायुक्त काया तो यम...

गए साल को सलाम

ऐ गये साल तुझे मैं न भूल पाऊंगा तू मेरे कितने ही ख़्वाबों को सच बना के गया तू मेरी ज़िन्दगी में ख़ुशनसीबी ला के गया मैं क्या गिनाऊँ, तेरे पहले क्या न था मुझमें मैं क्या बताऊँ, तूने क्या सुक़ूं भरा मुझमें जो तुझसे पहले मिला था, वो कुछ छिना भी है मेरे वजूद मेें ‘कुछ’ ख़ैर...

विक्रम और बेताल

विक्रम तुम तो वर्तमान हो बल, विवेक, सामर्थ्य सभी कुछ मिला-जुलाकर आगत का सिंगार करो तुम ये क्या अपने कंधे पर तुम भूत लादकर घूम रहे हो क्या तुमको आभास नहीं है जब भी तुम उस प्रेतकाय के उलझे केशों से उलझे हो तब तब तुम अपने भविष्य को पीठ दिखाए खड़े रहे हो और कभी जब उसे...

मुबारक हो, मुहब्बत मर रही है

सभी की आँख में अंगार बोये जा चुके हैं सभी की बोलियों में ख़ार बोये जा चुके हैं। सभी की मुट्ठियाँ भिंचने लगी हैं लकीरें बेसबब खिंचने लगी हैं सभी के दाँत अब पिसने लगे हैं पुराने ज़ख़्म फिर रिसने लगे हैं ये जलवा भी सियासत कर चुकी है हर इक दिल में शिक़ायत भर चुकी है सुना है...

अलविदा 2021

जब ढलेगा आज का सूरज तो उसके साथ ही बुझ जाएगी वो आख़िरी उम्मीद भी जो साल भर पहले लगा बैठे थे तुमसे हम सभी। याद है मुझको करोड़ों कामनाएं गूंज उठी थीं सभी मोबाइलों में; शुभ, मुबारक़ और कितने ही हसीं अल्फ़ाज़ लिखे थे तुम्हारे साथ घड़ी के एक-एक सेकेण्ड की आवाज़ पर उम्मीद का आकार...
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