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होली के दो रंग

दुनिया में होली शायद एकमात्र ऐसा त्योहार है जिसकी तैयारी में नहाना कतई ज़रूरी नहीं है। बल्कि यूँ कहें कि होली के लिए तैयार होते समय नहाना निषेध है। अन्य त्योहारों की तरह इस दिन नए-नए नहीं, पुराने-पुराने कपड़े पहने जाते हैं। छेदवाली बनियान पर घिसे हुए परिधान पहनकर सजे...

दशहरा

भय शत्रु पक्ष का गौण रहे अरि की चर्चा जब मौन रहे विश्वास स्वयं के शस्त्रों पर योद्धा का गहरा होता है तब विजय सुनिश्चित होती है बस तभी दशहरा होता है ✍️ चिराग़...

सृजन सुख

इस तपोवन में सृजन की साधनाएँ चल रही हैं ध्वंस से कह दो यहाँ उसके लिए अवसर नहीं है मन गहन संवेदना अनुभूत करने में जुटा है तन अभी स्वर-व्यंजनों में प्राण भरने में जुटा है भाव का उत्कर्ष छूकर नयन खारे हो रहे हैं इस सृजन सुख में जगत् के डर किनारे हो रहे हैं शब्द से सच का...

गए साल को सलाम

ऐ गये साल तुझे मैं न भूल पाऊंगा तू मेरे कितने ही ख़्वाबों को सच बना के गया तू मेरी ज़िन्दगी में ख़ुशनसीबी ला के गया मैं क्या गिनाऊँ, तेरे पहले क्या न था मुझमें मैं क्या बताऊँ, तूने क्या सुक़ूं भरा मुझमें जो तुझसे पहले मिला था, वो कुछ छिना भी है मेरे वजूद मेें ‘कुछ’ ख़ैर...

नवरात्रि और स्त्री

चैत्र मास की नवरात्रि मनुष्य जाति में प्रचलित सर्वाधिक विशेष उत्सवों में एक हैं। स्त्री मन की नौ अलग-अलग दशाओं की आराधना ही नहीं अपितु साधना तक की परंपरा का विधान है इस पर्व में। और थोड़ा सा ध्यान से देखें तो देवी के इन नौ रूपों में काव्य के नौ रस भी सहज ही दिखाई दे...
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