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असंतोष

जिस कुर्सी की एक कील मुझे बहुत चुभती थी; उसी कुर्सी पर किसी और का बैठना मुझे कील से ज़्यादा चुभता है। ✍️ चिराग़...

राजनीति

हर राजनेता चाहता है कि मेरा परिवार तो राजनीति में हो लेकिन मेरे परिवार में राजनीति न हो। ✍️ चिराग़...

डॉ प्रवीण शुक्ल

सही और ग़लत के पैमाने से आगे यह बहुत महत्त्वपूर्ण होता है कि आप अपने विचारों को कितनी शिद्दत से अभिव्यक्त करते हैं। और इस पैमाने पर मुझे डॉ प्रवीण शुक्ल हमेशा अव्वल दिखाई देते हैं। ऊर्जा का न जाने कौन सा इंजेक्शन लगाकर आए हैं कि थकान और आलस्य पर हमेशा के लिए विजय...

मन बोलता है

जब सब पंछी मौन हो गए कलरव के स्वर गौण हो गए जीवन की रफ़्तार सो गई दिन पर रात सवार हो गई ऐसा एकाकी पल पाकर मन हमको झकझोर उठा जब बाहर सन्नाटा पसरा, तब अन्तर में शोर उठा कितनी इच्छाएँ प्यासी थीं, कितने काम अधूरे निकले डुगडुगियों पर नाच रहे थे, हम तो एक जमूरे निकले कर को...

पराजित विजेता

आंधी के आघात सहे हैं ये शाखों के साथ बहे हैं सूखे हुए पड़े जो भू पर इनके कोमल गात रहे हैं हर मौसम से जूझे हैं ये, जूझे हैं, फिर टूट गए हैं ये उपवन के वो साथी हैं, जो शाखों से छूट गए हैं तूफानों का वेग सहा है, अब झोंकों से डरते हैं ये अपनी पूरी देह कँपाकर, उपवन में स्वर...
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