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भारत-पाक विभाजन

किसी की बात में आकर बँटा आँगन बना बैठे हमीं इक दूसरे को जान का दुश्मन बना बैठे जहाँ के खेत में बंदूक बोते थे भगत बाबा जहाँ की जेल में जगते थे, सोते थे भगत बाबा जहाँ हमको मिला दुश्मन की दहशत का नमूना था जहाँ फाँसी के फंदे को भगतबाबा ने चूमा था उसी लाहौर को अब जुर्म का...
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