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ख़ुदशनास

यूँ न समझो उदास बैठा हूँ आज मैं ख़ुदशनास बैठा हूँ मुझसे कोई अभी न बात करो मैं अभी अपने पास बैठा हूँ ✍️ चिराग़...

मन बोलता है

जब सब पंछी मौन हो गए कलरव के स्वर गौण हो गए जीवन की रफ़्तार सो गई दिन पर रात सवार हो गई ऐसा एकाकी पल पाकर मन हमको झकझोर उठा जब बाहर सन्नाटा पसरा, तब अन्तर में शोर उठा कितनी इच्छाएँ प्यासी थीं, कितने काम अधूरे निकले डुगडुगियों पर नाच रहे थे, हम तो एक जमूरे निकले कर को...

बचपन नहीं जाता

अगर कुछ शोख़ियों की ओर उसका मन नहीं जाता तो फिर इंसान के मन से कभी बचपन नहीं जाता कोई कितना भी ख़ुद को सख्त दिल कहता रहे लेकिन कभी यादों से पहले प्यार का सावन नहीं जाता भले ही मिट गया दीवार का नामो-निशां भी अब मगर मेरे ज़ेह्न से वो बँटा आंगन नहीं जाता चुभन ही क्यों बहुत...

अंतर्मुखी

ख़ुशी की लाश उठती है ख़ुशी की चाह के नीचे बहुत से ज़ख्म होते हैं ज़रा-सी आह के नीचे हमारे दिल की बातें दिल में ऐसे दब के रहती हैं कि जैसे पीर सोता हो कोई दरगाह के नीचे ✍️ चिराग़...

कोई गीत नहीं लिखा

तुम रूठी तो मैंने रोकर, कोई गीत नहीं लिखा इस ग़म में दीवाना होकर, कोई गीत नहीं लिखा तुम जब तक थीं साथ तभी तक नज़्में-ग़ज़लें ख़ूब कहीं लेकिन साथ तुम्हारा खोकर कोई गीत नहीं लिखा प्यार भरे लम्हों की इक पल याद नहीं दिल से जाती मन भर-भर आता है फिर भी साँस नहीं रुकने पाती...
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